अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2025: 90% पहाड़ खतरे में?
अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2025: 90% पहाड़ खतरे में?
नवंबर–दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला को लेकर दिया गया नया आदेश देशभर में बहस का विषय बन गया है। इस आदेश का सीधा असर राजस्थान, दिल्ली-NCR, पर्यावरण, जलवायु और भूजल पर पड़ सकता है।
🔥 अरावली पर बड़ा फैसला!
90% पहाड़ खतरे में?
⚠️ Supreme Court Order 2025
अरावली = भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा ढाल (Animated View)
सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की एक नई कानूनी परिभाषा को स्वीकार किया है। इसके अनुसार:
- 100 मीटर ऊंचाई नियम: केवल वही क्षेत्र अरावली पहाड़ी माना जाएगा जो आसपास की जमीन से 100 मीटर या अधिक ऊँचा हो।
- लगभग 90% अरावली बाहर: राजस्थान की अधिकांश अरावली इस दायरे से बाहर हो सकती है।
- खनन पर आंशिक रोक: नए खनन पट्टों पर रोक तब तक रहेगी जब तक मैनेजमेंट प्लान नहीं बनता।
राजस्थान और थार मरुस्थल पर असर
🌵 मरुस्थलीकरण का खतरा
अरावली थार मरुस्थल को दिल्ली, हरियाणा और जयपुर की ओर बढ़ने से रोकती है। पहाड़ियों के कटने से रेगिस्तान का विस्तार तेज हो सकता है।
💧 भूजल संकट
अरावली की चट्टानें भूजल रिचार्ज करती हैं। इनके नष्ट होने से बनास, लूनी और साहिबी जैसी नदियों का जलस्तर प्रभावित होगा।
🌪️ धूल भरी आंधियां
पहाड़ियां हवा की गति नियंत्रित करती हैं। इनके खत्म होने से NCR में प्रदूषण और धूल बढ़ेगी।
जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव
- मानसून पैटर्न में गड़बड़ी
- Heat Island Effect में वृद्धि
- दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता और खराब
वन्यजीव और जैव विविधता
अरावली एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है:
- 300+ देशी पौधों की प्रजातियां
- तेंदुआ, नीलगाय, सियार, लकड़बग्घा
- सारिस्का-रणथंभौर वन्यजीव गलियारे खतरे में
निष्कर्ष
यह फैसला केवल कानूनी नहीं बल्कि पर्यावरणीय चेतावनी है। यदि संतुलित नीति नहीं बनी तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q. अरावली पर्वतमाला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मरुस्थलीकरण रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और जलवायु संतुलन बनाए रखती है।
Q. क्या खनन पूरी तरह बंद हो गया है?
नहीं, केवल नए पट्टों पर अस्थायी रोक है।
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